पेट्रोल-डीजल का तोड़ ग्रीन हाइड्रोजन? जिससे चलने वाली कार में संसद पहुंचे थे नितिन गडकरी

 

 

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी आज अपनी हाइड्रोजन से चलने वाली कार टोयोटा मिराई में संसद पहुंचे. गडकरी पेट्रोल-डीजल को छोड़ फ्यूल के नए ऑप्शन की हमेशा बात करते रहते हैं और अब उन्होंने हाइड्रोजन कार चलाकर बता दिया कि फ्यूल का फ्यूचर हाइड्रोजन ही है. गडकरी के मुताबिक आत्मनिर्भर बनने के लिए, हमने ग्रीन हाइड्रोजन को पेश किया है जो पानी से बनता होता है. यह कार पायलट प्रोजेक्ट है. अब देश में ग्रीन हाइड्रोजन का बनना शुरू होगा. ज्यादा इंपोर्ट पर रोक लगेगी और रोजगार के नए मौके मिलेंगे.

 

गडकरी ने बताया कि भारत सरकार ने 3000 करोड़ रुपए का मिशन शुरू किया है और जल्द ही हम हाइड्रोजन को एक्सपोर्ट करने वाले देश बन जाएंगे. देश में जहां भी कोयले का इस्तेमाल होगा वहां ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाएगा. जनवरी में ही मंत्री ने बता दिया था कि वह जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाली नई कार में दिखाई देंगे. ये कार जापान की टोयोटा कंपनी की है और हाइड्रोजन ईंधन फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल पंप से भरा जाएगा.

 

नितिन गडकरी ने इस महीने की शुरुआत में भारत का पहला हाइड्रोजन आधारित एडवांस्ड फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल टोयोटा मिराई लॉन्च किया. कंपनी का दावा है कि इस कार में सिर्फ 5 मिनट में ईंधन भरा जा सकता है. यह कार एक बार फुल टैंक ईंधन भरने पर 646 किमी तक की दूरी तय कर सकती है. टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी ने यह अध्ययन करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है कि टोयोटा मिराई भारतीय सड़कों और जलवायु परिस्थितियों के लिए कितनी सही है.

 

ग्रीन हाइड्रोजन पारंपरिक ईंधन का एक ऑप्शन है जिसे किसी भी व्हीकल पर इस्तेमाल किया जा सकता है. ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन मध्यम से लंबी दूरी की यात्रा के लिए काफी भरोसेमंद मानी जा रही है. ग्रीन हाइड्रोजन एक शून्य-उत्सर्जन ईंधन है यानी इससे कोई प्रदूषण नहीं होगा. यात्रा के दौरान पानी के अलावा कोई उत्सर्जन नहीं होगा. एक कार में हाइड्रोजन भरने में 3 से 5 मिनट का समय लगेगा जैसे पेट्रोल भरने में लगता है.-हाइड्रोजन से चलने वाली कार में, गैस को एक हाई-प्रेशर टैंक में स्टोर किया जाता है. फिर इसे बिजली पैदा करने के लिए फ्यूल सेल में भेजा जाता है. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है.