Wednesday, July 24, 2024
उत्तर प्रदेशकला एवं साहित्यक्षेत्रीय ख़बरेंराजनीति

अयोध्या में रामलला के दर्शन को गर्मी में भी उमड़ा रेला

निर्भय सक्सेना। इस बार रामनवमी पर पीले वस्त्रों से भगवान राम का श्रृंगार हुआ। अयोध्या आए लाखो राम भक्तो ने जी भर कर रामलला को निहारा। महिलाओं ने गीत गाते हुए राम की महिमा का वर्णन भी किया। इस बार अयोध्या में कोविड की छूट के बाद भीषण गर्मी में भी रामभक्तों का रैला बढ़ता ही रहा। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद रही। अब बताया जा रहा ही कि अगली मकर संक्रांति तक मंदिर का गर्भगृह को तैयार कर लिया जायेगा। स्मरण रहे राम जन्मभूमि परिसर में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण कार्य आगामी जुलाई माह तक श्री राम चबूतरे का निर्माण पूरा होना है। इसके बाद मन्दिर के गर्भगृह से मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। श्री राम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र न्यास के महासचिव चम्पतराय के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2023 तक गर्भ गृह का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। बाद में राममंदिर के परिक्रमा, रंगमंडप, नृत्य मंडप और सिंह द्वार का निर्माण होगा।

वर्तमान में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में निर्माण के लिए 21 फुट ऊंचे मंदिर के चबूतरे का निर्माण चल रहा है। जिसमे ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही मंदिर के ढांचा को तैयार करने की तैयारी भी शुरू होगी। मंदिर के भूतल निर्माण में लगने वाले पत्थरों को राजस्थान के भरतपुर से श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर लाया जा रहा है। वही कुछ निर्माण कार्य के पूरा होते ही मंदिर के गर्भ गृह के निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाएगा।श्री राम मंदिर न्यास के अनुसार आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर लगने वाली अचार संहिता से पहले राममंदिर के भूतल का निर्माण पूरा किये जाने पर अब जोर दिया गया है।

 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी मंदिर निर्माण के लिए 21 फुट ऊंचे पत्थरों से मंदिर की कुर्सी को तैयार करने का कार्य चल रहा है जिस पर 37 क्यूबिक फीट कर हजारों पत्थर को एक के ऊपर एक रखे जाएंगे । तब जाकर यह आकार तैयार होगा। तो वही बताया कि जुलाई माह तक इस कार्य को पूरा किए जाने के बाद राम मंदिर के गर्भ ग्रह को इस वर्ष के मकर संक्रांति के पूर्व तैयार हो सकता है।

नियासी चंपत राय ने भगवान राम मंदिर निर्माण पर चर्चा करते हुए बताया है कि ट्रस्ट आदि ने 36 वर्षों से अयोध्या के राम मंदिर की लड़ाई लड़ी है। रामलला के प्रति आस्था का परिणाम है कि इंजीनियर ना होते हुए भी आज लार्सन एंड टूब्रो व टाटा जैसी कंपनियों के बड़े-बड़े इंजीनियर राम मंदिर निर्माण के फैसले से पहले मेरी राय लेते हैं। वहीं बताया कि आज बड़ी-बड़ी कंपनियों में आई आई टी के बड़े-बड़े इंजीनियर इस कार्य को लेकर आश्चर्य चकित है। राम जन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन राम मंदिर का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 40 फुट गहराई तक नींव डाली गई है। और मंदिर निर्माण कार्य पूरा होते ही उसका विशाल स्वरूप सब के सामने होगा।