पकी और कच्ची लीची स्वास्थ्य की दृष्टि-से उत्तम फल

लीची उत्तम स्वास्थ्यवर्धक फल है| पकी लीची अत्यंत स्वादिष्ट और खाने में मीठी, रसीली होती है, जबकि कच्ची लीची खाने में खट्टी प्रतीत होती है| रासयनिक दृष्टि-से लीची में शर्करा, वसा और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं| साथ ही इसमें आयरन (लोहा) भी विद्यमान है, जो नया रक्त बनाने में अग्रणी है| स्वास्थ्य की दृष्टि-से लीची एक उत्तम फल है|
1. दूर्बलता
लंबी बीमारी से आयी हुई दुर्बलता में प्रतिदिन दो सौ ग्राम लीची खाने से शक्ति आ जाती है|
2. पाचन-संस्थान
लीची के सेवन से पेट साफ़ रहता है, क्योंकि लीची पाचन-संस्थान को मजबूत बनाती है| भूख खुलकर लगती है तथा पेट व सीने की जलन मिटती है|
लीची नित्य खाने से अरुचि की शिकायत भी दूर हो जाती है|
3. हृदय की धड़कन
यदि हृदय की धड़कन अपेक्षाकृत तीव्र हो जाए, तो ऐसी अवस्था में लीची का रस यदि आठ-दस दिन लगातार पिया जाए, तो धड़कन सामान्य हो जाती है|
4. स्मरण-शक्ति
कुछ दिनों तक लीची का नित्य सेवन करने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्मरण-शक्ति तीव्र हो जाती है|
5. प्यास
गर्मी के दिनों में बार-बार प्यास लगने की अवस्था में लीची का रस पीने से तुरंत लाभ होता है| प्यास दूर होती है और शांति पड़ जाती है|
6. जलोदर
इस रोग में नियमित रूप-से लीची का रस पीना लाभकारी है| इससे मूत्र खुलकर आता है और बढ़ा हुआ पेट भी घटने लगता है|
7. अंडकोष की सूजन एवं दर्द
इस अवस्था में लीची, के बीज की गिरियों को पानी में पीसकर उसका गुनगुना लेप अंडकोषों पर करने से सूजन व दर्द में आराम होता है|
8. यकृत-रोग
यकृत ओ प्लीहा के रोगियों के लिए लीची बेहद असरदार है| दो-दो घंटे के अंतर पर लीची का रस (सौ ग्राम मात्र में) और पांच-पांच दानें एक साथ दिए जाएं, तो इस रोग से मुक्ति मिल जाती है| बढ़ा हुआ जिगर अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है और तिल्ली का दोष भी दूर हो जाता है|