Thursday, July 25, 2024
क्षेत्रीय ख़बरें

नशा, शराबखोरी, जुआ सट्टा आदि से अपने आपको हमेशा बचाए

संभल। कल रात नवाबखेल सरायतरीन में अंजुमन रौनक़े इस्लाम के तत्वाधान में गौसुल वरा कॉन्फ़्रेन्स का आयोजन किया गया जिसमें सुन्नी दावते इस्लामी के अमीर मौलाना शाकिर नूरी मुंबई और शेखुल हदीस मुफ़्ती निज़ामुद्दीन मिसबाही ने मुख्य रूप से अवाम को सम्बोधित किया।कॉन्फ़्रेन्स में हज़ारों लोगों का जमावड़ा रहा।

कॉन्फ़्रेन्स की शुरुआत तिलावते क़ुरान से कारी अकबर अली ने व मौलाना फारूक रज़ा ने हम्द और मौलाना हसीबुर रहमान ने नाते पाक पढ़कर की।

इसके बाद मौलाना तोसीफ रज़ा मिसबाही ने जलसे में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा नशा, शराबखोरी, जुआ सट्टा आदि से अपने आपको हमेशा बचाए रखो क्यूँकि यह माल की बरकतों को ख़त्म कर देती है और नाजायज़ है, यह अल्लाह के अज़ाब का सबब बनती है।

मुख्य वक्ता मौलाना शाकिर नूरी, मुंबई ने बहुत ही शानदार ख़िताब करते हुए फ़रमाया अल्लाह से हर वक्त तौबा करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “तौबा अस्तगफ़ार कीजिए क्यूँकि अस्तगफ़ार अज़ाबों से हिफ़ाज़त करती है। अल्लाह से हमें हर वक्त डरे रहना चाहिए इस तरह हम बुरे और ग़लत कामों से बचे रहेंगे। उन्होंने कहा नमाज़ों की पाबंदी बहुत ज़रूरी है, नमाज़ हर बुराई और बेहयाई से बचाती है।

इसके बाद मुफ़्ती निज़ामुद्दीन मिसबाही से लोगों ने सवाल पूछे जिसके सिराजुल फुकहा ने तसल्ली बख्श जवाब दिए। अवाम ने क्रिप्टोकरेन्सी, शादियों फ़िज़ूलखर्ची तथा नयी रस्मों पर आधारित सवाल पूछे। जिनको अवाम ने बहुत दिलचस्पी ने सुना, यह सिलसिला आधा घंटा चला।

मुफ़्ती ज़ाहिद अली सलामी ने अध्यक्षता करते हुए कहा सरायतरीन संभल के लोगों के लिए यह ख़ुशनसीबी है कि मौलाना शाकिर नूरी और मुफ़्ती निज़ामुद्दीन मिसबाही को सुनने और देखने का मौक़ा मिला।

जलसे में आए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया और पुलीस प्रशासन के सहयोग का भी शुक्रिया अदा किया।

संचालन मौलाना आदिल मिसबाही ने किया और मुख्य रूप से मौलाना नफ़ीस अख़्तर, कारी सुलेमान अशरफ़, मौलाना तालिब मिसबाही, कारी तनजीम अशरफ़, मुफ़्ती इकराम हक़, कारी राशिद, ख़्वाजा कलीम अशरफ़, मौलाना अब्बास, मौलाना फ़ाज़िल, मौलाना अली, राहत अज़ीज़ी, मौलाना आलिम, मौलाना आरिफ़, मौलाना कामिल, मौलाना मक़बूल, मौलाना शाकिर, मौलाना ज़ुबैर, मौलाना अलकमा, मौलाना शोकत, मौलाना आलमगीर, कारी असग़र, अंजुमन रौनक़े इस्लाम के पदाधिकारी कलीम अशरफ़, आलम, बिलाल, ज़की, मेहंदी हसन, अब्दुल वाहिद, इरफ़ान, अज़ीम, बब्बू, हाशिम, चाँदबाबू, मुजाहिद, अजमल, रहबर, शारिक जिलानी समेत हज़ारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।