Thursday, July 25, 2024
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांकेबिहारी मंदिर के नाम दर्ज जमीन के अभिलेख संबंधी आदेशों को किया रद्द

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव में बांके बिहारी मंदिर के नाम दर्ज जमीन का राजस्व अभिलेखों में समय-समय पर इंदराज बदलने संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही तहसीलदार को दो महीने में मंदिर की जमीन राजस्व अभिलेखों में बांकेबिहारी मंदिर के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है। आपको बता दें कि न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट की याचिका पर यह आदेश दिया है। कोर्ट ने इससे पहले स्थिति स्पष्ट करने के लिए इससे जुड़े सभी रिकार्ड तलब किए थे।

 

। कोर्ट में हाजिर एसडीएम, तहसीलदार व लेखपाल तहसील छाता ने इस प्रकरण में गलती मानी थी। आवेदन मिलने पर इंदराज बदलने की जानकारी दी थी। अब याचिका स्वीकार कर ली है और गलती सुधारने करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसडीएम व तहसीलदार छाता से पूछा कि शाहपुर गांव के भूखंड संख्या 1081 की स्थिति समय-समय पर क्यों बदली गई। कोर्ट ने समय-समय हुए इंदराज से जुड़े सभी रिकार्ड तलब किए और इसके बाद फैसला लिया।

 

याचिका के अनुसार प्राचीन काल से ही मथुरा के शाहपुर में गाटा संख्या 1081 बांके बिहारी महाराज के नाम दर्ज था। भोला खान पठान ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से 2004 में उक्त भूमि को कब्रिस्तान के रूप में दर्ज करा लिया। जानकारी होने पर मंदिर ट्रस्ट ने आपत्ति दाखिल की। प्रकरण वक्फ बोर्ड तक गया और आठ सदस्यीय टीम ने जांच में पाया कि कब्रिस्तान गलत दर्ज हुआ है। फिर भी भूमि पर बिहारी जी का नाम न दर्ज कर पुरानी आबादी दर्ज कर दिया गया।