गर्मी के मौसम में आपका खान-पान

शीत ऋतु (सर्दी) की अपेक्षा गर्मी के मौसम में पाचक आग्न मंद पड़ जाती है। खान-पान में जरा सी असावधानी होने पर कई भयंकर व्याधियों (बीमारियों) से इंसान घिर जाता है। यदि आहार-विहार मौसम के अनुसार करें तो अपने शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है। प्रस्तुत है ग्रीष्म ऋतु में खान-पान कैसा हो इस संबंध में विस्तृत जानकारी।

गर्मी के मौसम में खान-पान हल्का व सादा होना चाहिये। भोजन में मौसमी सब्जियों, दूध, दही व मट्ठे को भी सम्मिलित करना चाहिये। ये सभी स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी फायदेमंद होते हैं। पुदीना, प्याज व धनिया की चटनी बनाकर खायें। इससे खाना जहां जल्दी पचेगा, वहीं भूख भी बढ़ेगी।

इन दिनों सड़ा-गला, बासी व खुला पदार्थ बिल्कुल नहीं खाना चाहिये। क्योंकि इससे हैजा होने की संभावना अधिक रहती है। तले और मिर्च मसाले युक्त पदार्थों का सेवन अधिक न करें। खाने-पीने की वस्तुएं ढंक कर रखना चाहिये।

भूख से अधिक खाकर पेट को भारी न करें बल्कि भूख से एक और कम ही खाये, अन्यथा अधिक भोजन करने से अपच, उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है। दूसरी बात लंबे समय तक भूखा भी न रहे। भोजन के अभाव में शरीर में कमजोरी ही नहीं आती बल्कि वायु प्रकोप भी होती है।

इन दिनों बाजारों में अनेक बोतल बंद पेय मिलते हैं, जिसमें अप्राकृतिक सुगंध और केमिकल्स तथा सकरीन का प्रयोग होता है, जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। सबसे अच्छा उपाय यही करे कि घर में ही ठंडाई बनाये। ठंडाई में दही की लस्सी, कोकम का तेल, शरबत, नींबू, शरबत या शिकंजी बनाकर लें। बलवर्धन के लिये सुगंधित, शर्करा मिश्रित ठंडा पेय लें। ये सभी गर्मी की परेशानियों से राहत दिलाते हैं।

इस मौसम में प्यास बुझाने के लिये मौसमी फल जैसे अंगूर, अन्नस, अनार, आम व नारियल का रस पिये। इसके अतिरिक्त पके तरबूज, इमली, खरबूज, आम व ककड़ी का सेवन करें। आम का पना पीना लाभदायक होता है। लू भी नहीं लगती तथा गर्मी दूर भागती है।

भोजन निश्चित समय पर करें। आदत न हो तो डाले। बेसमय किया गया भोजन का शरीर पर (सेहत पर) बुरा प्रभाव पड़ता है।

इस मौसम में सत्तु का सेवन करना भी लाभप्रद होता है। प्रतिदिन दोपहर में सत्तु में चीनी व दुध मिलाकर खाये।

बर्फ व आइसीम का प्रयोग ज्यादा न करें। बर्फ का पानी ज्यादा पीने से हाजमा ही नहीं बिगड़ता है बल्कि गले में खराश भी होती है। बेहतर तो यही कि घड़े का ठंडा पानी ही पिये। ग्रीष्मऋतु में आइसाीम खाने का सबसे अच्छा समय शाम का है।

रात्रि में सोने के पूर्व एक गिलास मीठे दूध में दो चम्मच शुध्द घी मिलाकर अवशय पिये। यह संभव न हो तो एक गिलास ठंडा पानी ही पीये। घर से बाहर जायें तो भी दिन में पानी पीकर ही निकले, लू नहीं लगती।

प्रतिदिन सुबह शौच जाने के पूर्व एक गिलास पानी पिये। इससे कब्ज नहीं होता। नींबू नीचोड़कर भी पी सकते हैं।

इन दिनों किसी भी विषय पर ज्यादा न सोचे, गंभीरता से न लें और न ही किसी से झगड़ा करें, अन्यथा मानसिक संतुलन बिगड़ जायेगा, जिसका असर पाचन प्रणाली पर पड़ता है।

सुबह जल्दी उठे, पैदल चलें, हल्का व्यायाम करें। यह स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है। रात में अधिक देर तक न जागें।

सदा प्रसन्न रहें, चिंता न करें, और आशावादी बने।

इन दिनों चाय, काफी का सेवन कम करें।